वैदिक विवाह अनुष्ठान

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श्री. सचिन जोशी गुरुजी

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वैदिक विवाह अनुष्ठान – विस्तृत जानकारी

विवाह समारोह हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों (षोडश संस्कार) में से एक है। वैदिक परंपरा के अनुसार, विवाह केवल दो व्यक्तियों के बीच परिवार शुरू करने का अनुबंध नहीं है, बल्कि एक धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक बंधन है। इसमें दूल्हा, दुल्हन और उनके परिवार यज्ञों, मंत्रों और अनुष्ठानों के माध्यम से देवताओं के समक्ष प्रतिज्ञा लेते हैं और एक नए जीवन की शुरुआत करते हैं।

विवाह समारोह का उद्देश्य

दो व्यक्तियों को, उनके शरीर, मन और आत्मा को, एक पवित्र बंधन में बांधना। चार पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम) में से तीन को पूरा करने की शुरुआत - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। अगली पीढ़ी (संतान) को जन्म देकर वंश और संस्कृति का विस्तार करना।

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Vedic Ritual

विवाह समारोह की मुख्य संरचना

वैदिक विवाह अनुष्ठानों में कई विधियाँ हैं (जैसे ब्रह्मा विवाह, गंधर्व विवाह), लेकिन ब्राह्मण धर्मानुसार विवाह में यज्ञ और सप्तपदी मुख्य भाग हैं।

सीमांत पूजा मधुपर्क कन्यादान सप्तपदी (सात फेरे) अग्नि परिक्रमा शुभकामनाएं और आशीर्वाद

विवाह समारोह की मुख्य प्रक्रिया

सप्तपदी हिंदू विवाह का सबसे पवित्र और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण विधि है। अग्नि की उपस्थिति में वर और वधू सात कदम चलते हैं और प्रत्येक कदम पर संसार की समृद्धि के लिए विशेष संकल्प करते हैं:

भोजन की प्रचुरता स्वास्थ्य संपत्ति खुशी संतान दोस्ती एकता
इन सात कदमों और सात वचनों के द्वारा ही विवाह समारोह पूर्ण माना जाता है।
सप्तपदी विधी

विवाह विधीचे टप्पे (Wedding Rituals)

शुभ कार्यों की तैयारी

शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन के घर पर होने वाली शुभ रस्में: हल्दी लगाना, दूल्हे का स्वागत करना, पूजा-अर्चना करना।

विवाह हॉल का शुद्धिकरण

मंडप और विवाह स्थल की सफाई करें और कुंभ, मंगल कलश और यज्ञ कुंड को विधिवत सजाएं।

दूल्हे की पूजा और स्वागत

दूल्हे को देवता के समान माना जाता है और उसकी पूजा की जाती है तथा फूलों से उसका स्वागत किया जाता है।

कन्यादान

पिता या अभिभावक के द्वारा दुल्हन का हाथ ईश्वर और अग्नि की उपस्थिति में दूल्हे को सौंपा जाता है।

अग्नि परिक्रमा

यज्ञ कुंड में आग जलाई जाती है और समिधा एवं पवित्र आहुति देते हुए सप्तपदी पूरी की जाती है।

मंगलसूत्र और सिंदूर धारण

दूल्हा दुल्हन को मंगलसूत्र पहनाता है और उनके सिर पर केसर / सिंदूर लगाता है।

मंगलाष्टक

उपस्थित पुरोहित और परिवारजन मंगलाष्टक का उच्चारण करते हैं और नवविवाहित जोड़े पर अक्षत डालकर शुभ आशीर्वाद देते हैं।

आशीर्वाद और विसर्जन

अभिभावकों और परिवार के आशीर्वाद लेने के बाद विधि समाप्त कर देवता को शांति पूर्वक विसर्जित किया जाता है।

Vedic Ritual

मंत्र और बलिदान का महत्व

वैदिक विवाह में सभी अनुष्ठान यजुर्वेद और ऋग्वेद के मंत्रों के साथ संपन्न किए जाते हैं। चूंकि ये अनुष्ठान यज्ञ की उपस्थिति में संपन्न होते हैं, इसलिए विवाह केवल एक सामाजिक अनुबंध नहीं बल्कि एक धार्मिक बंधन बन जाता है। नवविवाहितों के लिए अग्नि को साक्षी मानकर जीवन भर एक-दूसरे के साथी बने रहने का संकल्प लेना ही सर्वथा महत्वपूर्ण है।

आजकल कई विवाह समारोह छोटे होते हैं, लेकिन पारंपरिक वैदिक विवाह अनुष्ठान अभी भी ब्राह्मणों, वैश्यों, क्षत्रियों और अन्य हिंदू समुदायों में, विशेष रूप से बड़े धार्मिक परिवारों और गांवों में व्यापक रूप से मनाए जाते हैं।