वास्तुकला परीक्षा

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श्री. सचिन जोशी गुरुजी

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वास्तोष्पते प्रतिजानीह्यस्मान् त्स्वावेशो अनमीवो भवान: । यत् त्वेमहे प्रति तन्नो जुषस्व शं नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे ॥

अर्थ: हे वास्तू देवते, आम्हाला सुखद आश्रय द्या आणि आमचे रोगव्याधींपासून रक्षण करा. या घरातील माणसे आणि पशू-प्राणी सर्वांना सुख-शांती लाभू दे.

वास्तु परीक्षण क्या है?


वास्तु परीक्षण किसी घर, कार्यालय, भवन या अन्य संरचना की बनावट, दिशा और ऊर्जा प्रवाह का विश्लेषण करने की प्रक्रिया है। वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार प्रत्येक स्थान की संरचना, आकार, वास्तु दोष और ऊर्जा प्रवाह वहां रहने वाले लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं।

वास्तु परीक्षण भवन या स्थान की संरचना में मौजूद कमियों की पहचान करता है और उन्हें दूर करने के लिए उचित उपाय सुझाता है। इसमें घर या इमारत के प्रत्येक भाग की जांच की जाती है, जिसमें फर्नीचर, दरवाजे, खिड़कियां आदि शामिल होते हैं।

वास्तु परीक्षण के माध्यम से घर, कार्यालय, दुकान या अन्य स्थानों से नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के उपाय बताए जाते हैं। इस प्रक्रिया द्वारा आंतरिक वातावरण की ऊर्जा को संतुलित किया जाता है, जिससे वहां रहने वाले लोगों का जीवन सुखमय, शांतिपूर्ण और समृद्ध बन सकता है।

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वास्तु परीक्षण की प्रक्रिया

साइट सर्वेक्षण : पहले चरण में वास्तु सलाहकार स्थल का सर्वेक्षण करता है। इसमें भूमि के आकार, दिशा, हवा का प्रवाह, सूर्य की स्थिति तथा अन्य भौगोलिक कारकों का अध्ययन शामिल होता है। इससे भूमि में ऊर्जा प्रवाह का अनुमान लगाया जाता है। साथ ही आसपास की इमारतों और पर्यावरण का भी निरीक्षण किया जाता है।
दिशा एवं स्थान विश्लेषण : वास्तु शास्त्र के अनुसार प्रत्येक दिशा और उससे संबंधित ग्रह, देवता एवं ऊर्जा का हमारे जीवन पर प्रभाव पड़ता है। घर या भवन की प्रत्येक दिशा (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण) का अध्ययन कर सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जाओं की पहचान की जाती है। पूर्व दिशा: सूर्य का सकारात्मक प्रभाव और उत्तम स्वास्थ्य। दक्षिण दिशा: स्थिरता और सुरक्षा। उत्तर दिशा: आर्थिक प्रगति और समृद्धि। पश्चिम दिशा: मानसिक शांति और व्यक्तिगत विकास।
वास्तु दोष निरीक्षण (वास्तु दोष विश्लेषण) : सलाहकार घर या इमारत में मौजूद वास्तु दोषों की पहचान कर उनके निवारण के उपाय सुझाता है। कुछ सामान्य वास्तु दोष इस प्रकार हो सकते हैं: स्थान का गलत लेआउट या दिशा। रसोई, कमरा या अलमारी का अनुचित स्थान। उत्तर-पश्चिम या अन्य कोनों में नकारात्मक ऊर्जा की उपस्थिति। घर का अत्यधिक छोटा या असंतुलित बड़ा आकार।
ऊर्जा प्रवाह और संतुलन : वास्तु शास्त्र में ऊर्जा के संतुलित प्रवाह को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। घर के सभी भागों में उचित ऊर्जा प्रवाह के लिए दरवाजों, खिड़कियों और फर्नीचर की सही स्थिति आवश्यक है। संतुलित ऊर्जा प्रवाह मानसिक शांति प्रदान करता है और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। साथ ही प्रत्येक भाग की आंतरिक संरचना को उचित स्थिति में बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।

सुधार और समाधान (उपचार और समाधान)

वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी स्थान में मौजूद दोषों या ऊर्जा असंतुलन को दूर करने के लिए विभिन्न उपाय किए जाते हैं। ये उपाय स्थान की ऊर्जा और संरचना के आधार पर सुझाए जाते हैं।
वास्तु यंत्र का उपयोग: रुद्राक्ष, कुबेर यंत्र, हनुमान यंत्र जैसे यांत्रिक उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
रंग संयोजन: घर के प्रत्येक क्षेत्र के लिए उपयुक्त रंगों का चयन किया जाता है। उदाहरण के लिए, नकारात्मक ऊर्जा को कम करने हेतु हल्के रंग और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए चमकीले रंग उपयोग किए जाते हैं।
खिड़कियाँ और दरवाजे: आवश्यकतानुसार दरवाजों या खिड़कियों का स्थान बदला जाता है।
फर्नीचर: घर में फर्नीचर और सजावट की वस्तुओं की वास्तु अनुसार उचित व्यवस्था की सलाह दी जाती है।

सकारात्मक वातावरण का निर्माण

वास्तु दोषों को दूर कर घर में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए विशेष पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और अन्य आध्यात्मिक उपाय किए जाते हैं। यह वातावरण मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
वास्तु सुधार और समाधान
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वास्तु परीक्षा के लाभ

सकारात्मक ऊर्जा वृद्धि

वास्तु शास्त्र के अनुसार उचित जांच-पड़ताल से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इससे घर के सदस्य सुखी और संतुलित रहते हैं।

व्यक्तिगत और व्यावसायिक सफलता

घर का उचित डिजाइन और संतुलन व्यक्तित्व, कार्यकुशलता और व्यवसाय में सफलता दिलाने में सहायक होता है।

वित्तीय समृद्धि

वास्तु शास्त्र का सही पालन करने से आर्थिक उन्नति संभव है। इससे व्यावसायिक स्थिरता और समृद्धि प्राप्त की जा सकती है।

स्वास्थ्य और मन की शांति

घर में ऊर्जा का संतुलित प्रवाह शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। इससे मनोबल बढ़ता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

पारिवारिक सामंजस्य

वास्तु शास्त्र का सही ज्ञान परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, सद्भाव और सहयोग को बढ़ावा देता है। घर में प्रत्येक सदस्य को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
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वास्तुकला परीक्षा में पूछे जाने वाले मुद्दे

वास्तु परीक्षण करते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान दिया जाता है:

घर की दिशा और आकार।
घर में मुख्य कमरे का स्थान।
घर में ऊर्जा का प्रवाह और स्थान।
दरवाजों और खिड़कियों की स्थिति।
रंग संयोजन, फर्नीचर और अन्य तत्वों का स्थान।
आध्यात्मिक, शारीरिक, मानसिक और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक उपाय।
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वास्तु परीक्षण के लिए विशेषज्ञ का चयन

अनुभव:

सही विशेषज्ञता और अधिक अनुभव वाले सलाहकार का चयन करें।

शिक्षा और प्रमाणन:

वास्तु शास्त्र के विद्वानों से प्रमाण पत्र प्राप्त होना अनिवार्य है।

ग्राहक प्रतिक्रिया:

विशेषज्ञ के काम और उनके द्वारा प्रदान की गई सेवाओं पर प्रतिक्रिया देखें।

उचित शुल्क:

उचित, तर्कसंगत और ईमानदार शुल्क लेने वाले सलाहकार का चयन करें।