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श्री. सचिन जोशी गुरुजी

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पुष्टिपते नमस्तुभ्य नमः शंकरसूनवे॥ ब्रह्मभूताय देवाय सर्वसिद्धिप्रदाय ते॥

पूजा विधि – वैदिक ग्रंथों के अनुसार विस्तृत जानकारी

वैदिक परंपरा में, पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि ईश्वर से जुड़ने, अपने कर्तव्यों के माध्यम से सृष्टि के संतुलन को बनाए रखने और आत्म-शुद्धि प्राप्त करने का एक तरीका है। मंत्र, यज्ञ, यज्ञ और अग्नि अनुष्ठानों को आधुनिक पूजा की तुलना में वैदिक पूजा में कहीं अधिक महत्व दिया जाता है।

वैदिक पूजा का उद्देश्य केवल मूर्तियों की पूजा करना ही नहीं है, बल्कि मंत्रों, यज्ञकर्म और अग्निहोत्र के माध्यम से दिव्य शक्तियों का आह्वान करना, उन्हें अर्पित करना और अंत में उनका विसर्जन करना भी है। प्रत्येक क्रिया के साथ विशिष्ट मंत्रों का पाठ किया जाता है।

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Vedic Ritual

पूजा अनुष्ठान का मुख्य सिद्धांत

वैदिक पूजा का उद्देश्य केवल मूर्तियों की पूजा करना ही नहीं है, बल्कि मंत्रों, यज्ञकर्म और अग्निहोत्र के माध्यम से दिव्य शक्तियों का आह्वान करना, उन्हें अर्पित करना और अंत में उनका विसर्जन करना भी है। प्रत्येक क्रिया के साथ विशिष्ट मंत्रों का पाठ किया जाता है।


पूजा की तैयारियाँ

शरीर और स्थान की पवित्रता:

स्नान करना और स्वच्छ वस्त्र पहनना, पूजा स्थल (मंडप या यज्ञशाला) को गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करना।

पूजा सामग्री:

फूल अक्षत कुमकुम तिल दूर्वा जल धूप दीप अगरबत्ती प्रसाद समिधा (बलि के लिए लकड़ी) घी (शुद्ध घी) यज्ञ कुंड

पूजा की प्रक्रिया

०1

संकल्प (संकल्प लेना)

पूजा के उद्देश्य को स्पष्ट करना, यह बताना कि किसकी, किस वस्तु की और किस देवता की पूजा की जा रही है। "मम सर्वकार्यसिद्धयर्थं श्रीपरमेश्वर प्रीत्यर्थं संकल्पमहे"

०2

प्रार्थना और सीटों की व्यवस्था

देवता का आह्वान करना और उनकी पीठ पर बैठने की प्रार्थना करना। "अवाहयामि, स्थापयामि, आसनम समर्पयामि"

०3

पद्य, अर्घ्य, आचमन

पद्य (पैर धोने के लिए जल), अर्घ्य (हाथ और पैर धोना) और आचमन (मुंह धोना) अर्पित करना।

पूजा की प्रक्रिया

स्नान और वस्त्र अलंकरण

देवता को मंत्रों से युक्त जल से स्नान कराना और वस्त्र एवं आभूषण अर्पित करना।

सुगंध, फूल, धूप और दीपक की भेंट

चंदन, फूल, अगरबत्ती और दीपक अर्पित करना।

नैवेद्य और ताम्बुल अर्पण

भोजन, फल, मिठाई (नैवेद्य) अर्पित करना और फिर पान के पत्ते (ताम्बुल) देना।

मंत्रोच्चारण और स्तुति

देवी-देवताओं के मंत्रों का जाप, स्तोत्र और ऋचाओं का पाठ। जैसे "ओम नमो भगवते वासुदेवाय" या "ओम त्र्यंबकम यजामहे"।

मुखपृष्ठ / यज्ञ कर्म

अग्निहोत्र के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए घी और समिधा अर्पित करें। प्रत्येक आहुति के लिए "स्वाहा" कहना आवश्यक है।

आरती और प्रार्थना

दीपक जलाकर आरती करें और अंत में श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें।

परिक्रमा एवं नमस्कार

देवता की परिक्रमा करना और उन्हें प्रणाम करना।

क्षमा और दोषमुक्ति

पूजा के दौरान हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा मांगें और शांतिपूर्वक देवता को विसर्जित करें।

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मंत्रों का महत्व

वैदिक उपासना में मंत्रचरण सबसे महत्वपूर्ण है। अग्नि, वायु, सूर्य, इंद्र, वरुण जैसे देवताओं को इन मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, क्योंकि अग्नि के माध्यम से ही आहुति देवताओं तक पहुँचती है। मंत्र ध्वनि के रूप में कंपन होते हैं, जो उपासक और ब्रह्मांड के बीच संबंध को गहरा करते हैं।

वैदिक उपासना के पीछे का दर्शन

बलिदान का अर्थ है उपासना का शुद्धिकरण —

यह महज एक विश्वास नहीं है, बल्कि एक गहरी प्रक्रिया है जो हमें ब्रह्मांड की ऊर्जा से जोड़ती है।

सृष्टि के ऋतुओं का संरक्षण करना —

ब्रह्मांड में प्राकृतिक संतुलन को चढ़ावों, मंत्रों और अनुष्ठानों के माध्यम से बनाए रखा जाता है।

ईश्वर के प्रति सम्मान —

हर भेंट हमारे अहंकार का बलिदान है।