भू-उर्जा तणाव

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श्री. सचिन जोशी गुरुजी

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चतुरस्त्रा द्वीप्याकाराम सिंहोक्षाश्वेभरूपिणीम् । वृत्तच्च भद्र पीठच्च त्रिशूलम लिंग सन्निभम् ॥
प्रासादध्वजकुम्भादि देवानामपि दुर्लभम ।

अर्थ: चौरस, हत्ती किंवा सिंहासारखे शुभ आकार असलेले भूखंड, तसेच ध्वज, कलश किंवा त्रिशूळ सदृश भूमी अत्यंत भाग्यवान आणि देवांनाही दुर्मिळ मानली जाते.

भूविभागीय तनाव और ज्योतिष

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पृथ्वी पर ऊर्जा क्षेत्रों का महत्व बहुत अधिक है। यह न केवल पृथ्वी पर मौजूद वस्तुओं और वातावरण को प्रभावित करता है, बल्कि उस स्थान पर रहने वाले व्यक्ति के जीवन को भी प्रभावित करता है। जियोपैथिक स्ट्रेस का अर्थ है उस स्थान पर ऊर्जा क्षेत्र का असंतुलन, जो व्यक्ति के शरीर, मन और व्यवहार को सीधे प्रभावित करता है। ज्योतिष शास्त्र में इसका विश्लेषण और उपचार किया जाता है।
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भू-ऊर्जा तनाव और ज्योतिष का प्रभाव

ऊर्जा क्षेत्र: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पृथ्वी पर प्रत्येक स्थान, भवन या घर का अपना ऊर्जा क्षेत्र (आभा) होता है। यदि इन ऊर्जा क्षेत्रों में कोई असंतुलन या नकारात्मक प्रभाव हो, तो यह उस स्थान पर रहने वाले लोगों के जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। भू-ऊर्जा तनाव वाले स्थानों में ऊर्जा संतुलन बिगड़ सकता है, जिसका लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
चंद्रमा का प्रभाव: ज्योतिष में चंद्रमा का विशेष स्थान है। चंद्रमा की बदलती स्थिति पृथ्वी के ऊर्जा क्षेत्र में असंतुलन पैदा कर सकती है। पृथ्वी की ऊर्जा पर पड़ने वाला यह तनाव तब और भी बढ़ जाता है जब चंद्रमा किसी विशेष स्थिति में होता है, जैसे पूर्णिमा या अमावस्या।
राहु और केतु का प्रभाव: राहु और केतु ग्रहों का पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ये ग्रह घर के वास्तु के ऊर्जा प्रवाह को भी प्रभावित करते हैं। इनके असंतुलन से भू-ऊर्जा तनाव बढ़ सकता है।
वास्तु दोष: ज्योतिष शास्त्र में, घर का वास्तु दोष एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। जिन स्थानों पर वास्तु शास्त्र का पालन नहीं किया जाता, वहां भू-ऊर्जा का तनाव उत्पन्न हो सकता है। इससे घर की ऊर्जा असंतुलित हो जाती है, जिसका प्रभाव वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ता है। इस दोष के कारण व्यक्ति को शारीरिक विकार, मानसिक तनाव और जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

भू-ऊर्जा तनाव के प्रभावों का ज्योतिषीय विश्लेषण

भौतिक समस्याओं का सृजन:

ज्योतिष शास्त्रानुसार, भू-ऊर्जा तनाव असलेल्या ठिकाणी राहणाऱ्या व्यक्तीला विविध शारीरिक विकार निर्माण होऊ शकतात. उदाहरणार्थ, पाठीच्या दुखणे, डोकेदुखी, इन्फेक्शन, हाडांच्या विकार आणि हृदयासंबंधी समस्यांचा वाढता धोका असतो..

मानसिक तणाव और चिंता:

भू-ऊर्जा तनावामुळे व्यक्तीला मानसिक तणाव, चिंता, चिडचिडपणा, आणि चूक निर्णय घेण्याची प्रवृत्ती वाढू शकते. ज्योतिष शास्त्रानुसार, उर्जा क्षेत्राची गडबड मानसिक संतुलनावर परिणाम करते.

जीवन में असफलताएँ और कठिनाइयाँ:

घर या दफ्तर में भू-ऊर्जा से संबंधित तनाव वित्तीय कठिनाई, व्यापारिक परेशानियां, पारिवारिक विवाद और नौकरी में असफलता का कारण बन सकता है।

भू-ऊर्जा तनाव के लिए ज्योतिषीय उपाय

वास्तु शास्त्र का पालन: ज्योतिषशास्त्र में घर की बनावट को महत्व दिया जाता है। घर की दिशा, प्रवेश द्वार और प्रत्येक कोने की स्थिति उसके ऊर्जा संतुलन को प्रभावित करती है। वास्तु शास्त्र का सही पालन करके भू-ऊर्जा तनाव को दूर किया जा सकता है।
रुद्राक्ष और द्रव्यों का उपयोग: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रुद्राक्ष, मनके बनाने की तकनीक और कुछ विशेष पदार्थों का उपयोग नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए किया जाता है। रुद्राक्ष धारण करने से ऊर्जा संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
ग्रहों के दोषों का निवारण: ग्रहों के दोष, विशेषकर राहु, केतु और शनि के प्रभाव से पृथ्वी ऊर्जा का तनाव बढ़ सकता है। इसके लिए ज्योतिषी ग्रहों को शांत करने, देवता की पूजा करने और विशेष रत्न धारण करने का सुझाव देते हैं। सुचवतात.
स्मरण एवं ध्यान: ध्यान और साधना मानसिक संतुलन प्राप्त करने के प्रभावी तरीके हैं। ये ऊर्जा प्रवाह को शुद्ध करते हैं और मानसिक तनाव को दूर करते हैं।
ऊर्जा शुद्धिकरण उपकरण: भू-ऊर्जा तनाव से निपटने का सबसे अच्छा तरीका उस क्षेत्र की ऊर्जा को शुद्ध करना है। यह ऊर्जा शुद्धिकरण उपकरण, क्रिस्टल या ध्यान के माध्यम से किया जा सकता है।
यज्ञाची प्रमुख अंगे
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निष्कर्ष

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पृथ्वी पर प्राकृतिक ऊर्जा के असंतुलन के कारण भू-ऊर्जा तनाव उत्पन्न होता है, जो व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। वास्तु शास्त्र, ग्रह दोष निवारण और रुद्राक्ष धारण जैसी विभिन्न तकनीकों का उपयोग करके इसका निवारण किया जाता है। उचित उपाय करने से भू-ऊर्जा तनाव दूर हो सकता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।