वास्तु शास्त्र

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श्री. सचिन जोशी गुरुजी

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भ्रूगुरत्रिर्वसिष्ठश्च विश्वकर्मा मयस्तदा । नारदो नग्नजिच्चैव विशालाक्ष: पुरन्दर :।।
ब्रह्मा कुमारो नंन्दीश : शौनको गर्ग एव च । वासुदेवो अनिरुद्धश्च तथा शुक्र बृहस्पती :।।
अष्टादशैते विख्यता वास्तूशास्रोपदेशका संक्षेपण उपदिष्टम यन्मनवे मत्स्यरूपिणा ।।

अर्थ: भृगू, अत्री, वसिष्ठ, विश्वकर्मा, मय, नारद, नग्नजित, विशालाक्ष, पुरंदर, ब्रह्मा, कुमार, नंदीश्वर, शौनक, गर्ग, वासुदेव, अनिरुद्ध, शुक्राचार्य आणि बृहस्पती — हे वास्तुशास्त्राचे १८ प्रख्यात उपदेशक (प्रवर्तक) मानले जातात. मत्स्य रूप धारण केलेल्या भगवान विष्णूंनी राजा मनूला वास्तुशास्त्राचे जे ज्ञान थोडक्यात सांगितले, त्यात या १८ विद्वानांच्या परंपरेचा उल्लेख केला आहे.

वास्तु शास्त्र क्या है?

वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो घर, कार्यालय, मंदिर, विद्यालय, भवन आदि के निर्माण और संरचना का मार्गदर्शन करता है। "वास्तु" का अर्थ है घर, भवन या अन्य वस्तु की संरचना, और "शास्त्र" का अर्थ है उचित संरचना निर्धारित करने के लिए विद्वतापूर्ण जानकारी।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक वास्तु की दिशा, आकार, रंग, संरचना और अन्य तत्व उस वास्तु में रहने वाले लोगों के जीवन पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने और नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए वास्तु शास्त्र के नियम महत्वपूर्ण हैं।

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वास्तु शास्त्र का महत्व


वास्तु शास्त्र हमें अपने घरों में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करने में मार्गदर्शन करता है। इसके मुख्य उद्देश्य हैं:

घर में समृद्धि, सुख और शांति लाना। नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना। परिवार के सदस्यों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करना। घर के हर हिस्से का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करना।

वास्तु शास्त्र के ज्ञान का उपयोग करने से घर की ऊर्जा सुचारू और संतुलित रहती है, जिससे व्यक्ति का जीवन अधिक सुखी और समृद्ध हो सकता है।
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वास्तु शास्त्र के कुछ प्रमुख सिद्धांत

दिशाओं का महत्व

वास्तु शास्त्र में प्रत्येक दिशा का अपना महत्व है। प्रत्येक दिशा विशिष्ट ग्रहों, देवी-देवताओं और ऊर्जाओं से जुड़ी होती है।

पूर्व दिशा: सूर्य — ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि

पश्चिम दिशा: चंद्रमा — शांति और सुख

उत्तर दिशा: व्यावसायिक सफलता, करियर और प्रगति

दक्षिण दिशा: शनि — सुरक्षा और संरक्षण

मुख्य द्वार का स्थान

घर के मुख्य द्वार का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होना आवश्यक है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, मुख्य द्वार पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए।

द्वार पर किसी प्रकार की रुकावट या अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए।

रंग चयन

वास्तु शास्त्र में रंगों का प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। प्रत्येक रंग का एक विशिष्ट ऊर्जा प्रभाव होता है।

सफेद रंग — शांति और पवित्रता

नारंगी रंग — ऊर्जा और उत्साह

लाल रंग — रोमांच और प्रेम

पीला रंग — सुख और समृद्धि

बेडरूम का स्थान

शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम कोने में होना चाहिए। यह स्थान मानसिक और शारीरिक विश्राम के लिए आदर्श है।

शयनकक्ष को सादगी से सजाना चाहिए और अत्यधिक रंगीन वस्तुओं से बचना चाहिए।

रसोई का स्थान

रसोई घर के दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोने) में होनी चाहिए क्योंकि यह दिशा अग्नि तत्व से जुड़ी होती है।

रसोई में अग्नि, जल और वायु का संतुलन होना आवश्यक है।

रसोई को साफ रखना और उचित वेंटिलेशन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

फर्नीचर का समझदारीपूर्ण और उपयुक्त उपयोग

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में फर्नीचर की स्थिति और आकार भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसका प्रभाव घर के हर सदस्य पर पड़ता है।

फर्नीचर को सही ढंग से रखने से घर में ऊर्जा का प्रवाह बेहतर और संतुलित होता है।


वास्तु दोष और उनके निवारण


वास्तु दोष घर या इमारत की संरचनात्मक समस्याएं हैं जिनके कारण घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे आर्थिक, मानसिक, शारीरिक या भावनात्मक तनाव हो सकता है।

मुख्य दरवाजा या खिड़कियाँ

घर के मुख्य दरवाजे की गलत दिशा या खिड़कियों के सही दिशा में न होने के कारण घर में ऊर्जा बर्बाद होती है। उपाय: मुख्य द्वार के सामने पेड़ों और अन्य बाधाओं से बचें। साथ ही, खिड़कियों को साफ रखें।

विनम्रता की भावना

घर में गलत दिशा में रखी चीजें या अनावश्यक सामान होने से मन की शांति भंग हो सकती है। समाधान: घर के वातावरण को स्वच्छ रखें और ऊर्जा के निर्बाध प्रवाह के लिए आवश्यक वस्तुओं के उपयोग को सीमित करें।

अजीबोगरीब घर का डिज़ाइन

यदि किसी घर का डिजाइन या निर्माण बहुत ही अजीब या गलत तरीके से किया जाता है, तो वह नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। समाधान: घर के डिजाइन में उचित सुधार करें। फर्नीचर और अन्य तत्वों को संतुलित रखें।
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वास्तु शास्त्र के लाभ


वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं:

सकारात्मक ऊर्जा:

इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और अच्छा वातावरण बनता है।

समृद्धि और सफलता:

व्यापार और करियर में प्रगति के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि भी बढ़ती है।

पूर्ण शांति:

मन की शांति और मानसिक संतुलन प्राप्त किया जा सकता है।

परिवार में प्रेम और समृद्धि:

घर के हर सदस्य के लिए एक खुशनुमा और प्रेमपूर्ण वातावरण तैयार होता है। वास्तु शास्त्र के सभी नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और स्फूर्ति आती है। इससे जीवन की कई समस्याओं का समाधान हो सकता है और आपके परिवार में समृद्धि, शांति, सुख और सफलता आ सकती है।